Thursday, August 25, 2016

कुछ हस के बोल दिया करो, कुछ हस के टाल दिया करो

कुछ हँस के
बोल दिया करो,
कुछ हँस के
टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत
परेशानियां है
तुमको भी
मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले
वक्त पे डाल दिया करो,
न जाने कल कोई
हंसाने वाला मिले न मिले..
इसलिये आज ही
हसरत निकाल लिया करो !!
समझौता करना सीखिए..
क्योंकि थोड़ा सा
झुक जाना
किसी रिश्ते को
हमेशा के लिए
तोड़ देने से
बहुत बेहतर है ।
किसी के साथ
हँसते-हँसते
उतने ही हक से
रूठना भी आना चाहिए !
अपनो की आँख का
पानी धीरे से
पोंछना आना चाहिए !
रिश्तेदारी और
दोस्ती में
कैसा मान अपमान ?
बस अपनों के
दिल मे रहना आना चाहिए...!- गुलज़ार

No comments:

Post a Comment

कहानी किट्टी की

रोज की तरह आज भी वो अनिरुद्ध का   इंतजार कर रही थी, उसी खिड़की से. समय भी वही है मानो घडी कलाई में ही बाध रखी. ये अनिरुद्ध के नास्ते का ...